Wednesday, 22 February 2023

पीड़ा

मधु तुम्हारे प्रसव का वक्त नज़दीक आ रहा है, कल मेरी छुट्टी है तुम्हें मायके छोड़ दूँ! मधु के पति रमन ने कहा!
मधु: नहीं! पिछली बार जब गुड़िया का प्रसव मायके में हुआ तो भाभी को बिल्कुल अच्छा नहीं लगा, मैं मायके नहीं जाना चाहती!!
रमन: तो माँ को यहाँ बुला लो!!
मधु: मेरी माँ पुराने ख्यालों की है बेटी के घर नहीं आएगी। भाभी को भी अच्छा नहीं लगेगा कि माँ मेरी मदद करने आए, क्योंकि मुन्ने को वही रखती हैं। भाभी ने मुन्ने को जन्म जरूर दिया है किन्तु पालन-पोषण की जिम्मेदारी माँ की ही है!!
रमन: मधु! लेकिन तुम्हारे प्रसव के लिए कोई न कोई व्यवस्था तो करनी ही पड़ेगी, वह भी जल्दी, क्योंकि 8वाँ महीना बीत चुका है कभी भी प्रसव पीड़ा की शुरुआत हो सकती है!!
मधु: रमन क्यों न तुम अपनी माँ से बात करो कि वे यहाँ आ जाएं या मैं उनके पास चली जाऊँ??
रमन: नहीं! मधु तुम जानती हो माँ ने मुझसे रिश्ता तोड़ दिया है। न तो वे यहाँ आएंगी और न ही हमारी कोई मदद करेंगी! पिता की मृत्यु किन हालातों में हुई?? वे नहीं भूली हैं। उन्हें मुझसे कोई लगाव नहीं!!
मधु: तुम एक बार बात तो करो!!
रमन: नहीं! जब मैं जवाब जानता हूँ फिर बात कैसे करूँ!!
मधु: मेरी गलती की सजा आखिर तुम्हें कब तक मिलती रहेगी, माँ मुझे कभी माफ भी करेंगी या नही, मैं माँ से बात करूँ??
रमन: तुम्हारी मर्जी!!
मधु:(सासु माँ को फोन लगाते हुए) माँ! माँ! मुझे माफ कर दीजिए, आप कब तक हमसे नाराज रहेंगी?? मैं प्रसव के लिए आपके पास आ रही हूँ या आप यहाँ आ जाइए!!
सासु माँ: नहीं! मधु मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकती! आगे से मुझे कभी फोन मत करना!! इतना कहकर उन्होंने मधु का जवाब सुने बिना ही फोन काट दिया!!

सात साल हो गए लगता है कल ही की बात है!
रमन ने बीए पास करते की कम्पनी में जाॅब शुरु कर दिया! कुछ दिन बाद ही मधु के चाचा दिल्ली में रहने वाले अपने बड़े भाई की बेटी मधु का रिश्ता गोविंदजी और गीता जी की इकलौती संतान रमन के लिए लेकर आए। माता-पिता और रमन ने लड़की देखी जो ठीक-ठाक थी सम्बन्ध पक्का हो गया। साधारण तरीके से बिना दहेज विवाह सम्पन हो गया। 
मधु ससुराल आ गई। रमन के पिता हाल ही में अध्यापक पद से रिटायर हुए थे, माँ के रिटायर होने में दो वर्ष शेष थे वह भी शिक्षिका थी। सम्पन्न परिवार था किन्तु दिल्ली में रहने वाली मधु आजाद ख्यालों की थी। वह सास ससुर की बंदिश में रहना नहीं चाहती थी इसलिए उसने रमन पर दिल्ली में जाॅब करने का दबाव बनाया। रमन ने अपने माता-पिता को छोड़कर दिल्ली जाने से साफ इन्कार कर दिया। इससे मधु बुरी तरह तिलमिला गई। उसने दिल्ली फैमिली कोर्ट में सास ससुर एवं रमन पर दहेज के लिए मारपीट और ससुर पर तो छेड़छाड़ का भी केस लगा दिया। तीनों को जेल जाना पड़ा। बहुत बदनामी हुई। 
ससुर इस सदमे को सहन नही कर पाए उन्होंने दम तोड़ दिया!
मधु से पीछा छुड़ाने के लिए गीता जी ने एक मुश्त रकम 3000000/- जो कि मधु तलाक देने के एवज में मांग रही थी, कोर्ट में जमा करा दी। दोनों का तलाक हो गया। 
तलाक के 6 महीने के अंदर ही रमन की रेलवे में सरकारी जाॅब लग गई। रमन दूसरे शहर में रेलवे क्वार्टर में रहने चला गया।
रमन के लिए रिश्तों की लाइन लग गई। 
मधु को भी रमन की नौकरी की भनक लग चुकी थी वह रमन से सम्पर्क साधने लगी।
जब रमन ने उसके सम्पर्क का कोई जवाब नहीं दिया तो एक दिन वह रमन के रेलवे क्वार्टर में आ धमकी और उसके पैरों पर गिर कर माफी मांगने लगी।
रमन मुझे माफ कर दो मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। 3000000/- वापस लेलो लेकिन मुझे माफ कर दो। आसपास रहने वाले लोग इकट्ठे हो गए। 
रमन को चुप देख कर बोली, "जब तक तुम मुझे माफ नहीं करोगे, मैं यहाँ से नहीं जाऊंगी!"
रमन बोला, "माफ कर दिया जाओ यहाँ से।"
मधु चली गई और रमन को बार-बार फोन करने लगी। रमन ने उसके किसी फोन का जबाव नहीं दिया।
वह फिर से रमन के पास आ धमकी और उस पर फिर से शादी करने का दबाव बनाने लगी। रमन ने मना कर दिया तो उसने कुएं में पैर लटका लिए और बोली, "अगर तुमने शादी के लिए हाँ नहीं की तो 
मैं कुएं में कूदकर जान दे दूंगी।"
भावुक रमन उसके कहे को सच मानकर बातों में आ गया और हाँ कर दी!
मधु ने पूछा,"कब करोगे शादी??"
रमन बोला, "माँ से बात करके बताऊँगा।"
जल्दी बताना कहकर मधु चली गई!!
मधु ने रमन को फोन करने का प्रयास किया, किन्तु रमन ने फोन नहीं उठाया!!
मधु एक महीने बाद फिर आ गई।
मधु: तुम मेरा फोन क्यों नहीं उठाते??
रमन ने कोई जवाब नहीं दिया!!
मधु: अभी मुझसे शादी करो, वर्ना मैं सबके सामने अभी जान दे देती हूँ!! 
रमन घबरा गया। माँ को फोन लगा कर सारी स्थिति से अवगत कराया।
माँ ने कहा, "मैं पुलिस को फोन कर रही हूँ, तू उससे कह कि तू उससे शादी नहीं करेगा!!"
रमन डरते-डरते बोला, "माँ!! वह मर गई तो मुझे जेल जाना पड़ेगा!"
माँ: "कुछ नहीं होगा, वो तुझे पागल बना रही है!!"
रमन: "नहीं माँ! वह सच में मर जाएगी।
दृढ़निश्चय चेहरे पर दिख रहा है!!"
माँ: मेरी बात समझ कुछ नहीं होगा, तू उसकी फिक्र क्यों कर रहा है?? 
उसने हम सबके साथ जो किया है उसे मत भूल!! तेरे पिता की जान चली गई!!"
रमन: इसके लिए उसे बहुत पछतावा है उसने माफी मांग ली है!!
माँ: बेटा! कुछ गुनाहों की माफी नहीं होती!!
रमन: माँ कितना खींचेगें, जो हो गया उसे भूल जाइए। शादी तो किसी न किसी से करनी ही है। मधु अपने किए पर बहुत शर्मिन्दा है। हमें उसके (मधु ने रमन के हाथ से फोन ले लिया) माँ मुझे माफ कर दीजिए, मैं आपकी गुनहगार हूँ!!
मधु की आवाज सुनते ही गीता जी ने फोन काट दिया!! मधु समझ गई कि सासु माँ नहीं मानने वाली। 
मधु रमन पर शादी का और अधिक दबाव बनाने लगी। वह इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहती थी, वह जानती थी कि रमन उसके झांसे में आ चुका है, सासु माँ कभी तैयार होगी नहीं!! 
उसने रमन से कहा, "अन्य लड़की से तुम्हारी शादी हुई, उसे तो मैं नहीं होने दूंगी। उसी पल जान दे दूंगी। फिर उलझते रहना पुलिस से।
भावुक रमन मधु के पैंतरों के सामने कितना टिकता??"
रमन ने माँ को फोन लगा दिया, "माँ मेरी शादी ये किसी से होने नहीं देगी, अगर हो भी गई तो चैन से जीने नहीं देगी, इससे बेहतर है कि इससे ही शादी कर लेता हूँ
फालतू के झंझटों से तो बच जाऊँगा!!"
माँ: ठीक है बेटा शादी करने से पहले अपनी माँ की मौत का शोक मना कर चिता को आग दे देना!!"
ये कहकर गीता जी ने फोन काट दिया।
रमन ने माँ को बार-बार फोन लगाया किन्तु माँ ने फोन नहीं उठाया। रमन ने सोचा माँ कितने दिन नाराज रहेगी, मना ही लूंगा।
मधु इस मौके को गंवाना नहीं चाहती थी उसी शाम मंदिर में दोनों ने शादी कर ली।
दूसरे दिन सुबह दोनों माँ से मिलने निकल पड़े। घर पहुंच कर रमन ने घंटी बजाई।
माँ ने दरवाजा खोला सामने रमन और मधु को देखकर भौंचक्की रह गई। रमन और मधु पैरों पर झुके तब उसकी तंद्रा भंग हुई उसने पैर पीछे खींच लिए। 
रमन से बोली, "उल्टे पैर वापस लौट जा मैं तेरी शक्ल देखना नहीं चाहती।
तू अपने पिता का अपमान और मौत भूल चुका है। मैं नहीं भूल सकती लेकिन तेरे इस कारनामे के बाद तुझे जरूर भूल सकती हूँ! जिंदगी में कभी मुझे अपनी शक्ल मत दिखाना। हम दोनों एक-दूजे के लिए मर गए!!" इतना कहकर गीता जी ने दरवाजा बन्द कर लिया। बेटा माफी मांगता रहा, दरवाजा खोलने का आग्रह करता रहा किन्तु गीता जी ने दरवाजा नहीं खोला। रमन और मधु वापस चले गए। 5 वर्ष हो गए गीता जी ने रमन से कोई सम्पर्क नहीं किया न ही रमन का कोई फोन उठाया।
गीता जी ने 300 वर्ग फुट के मकान को वृद्धाश्रम के लिए दान कर दिया जितनी भी जमा पूंजी थी उसका एक ट्रस्ट बना दिया जो कि वृद्धाश्रम के बुजुर्गों पर खर्च होगी। मधु ने सास-ससुर की प्रोपर्टी और जमा पूंजी को पाने के लिए बहुत हाथ पैर मारे किन्तु कामयाब नहीं हो पाई।
मधु को 3 वर्ष की एक बेटी है, उसका दुबारा प्रसव होने वाला है।
किसी तरह मधु ने अपनी मां को प्रसव के लिए अपने पास बुला लिया। 
प्रसव होने के बाद मधु की माँ ने गीता जी को फोन किया, कहा, "बहिन जी मधु ने आपके पोते को जन्म दिया है, गुस्सा थूक दीजिए, गले लगा लीजिए!"
गीता जी: "जब बेटा ही नहीं है तो पोता कहाँ से आ गया??" कहते हुए गीता जी ने फोन काट दिया!!

स्वरचित-सरिता श्रीवास्तव "श्री"
धौलपुर (राजस्थान)


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