एक दिन उन्होंने एक लड़की देखी और हो लिए उसके पीछे, जवान चलने लगी- चल आजा, मेरे साथ चल, थोड़ा सा काम है, तुझे पैसे भी दूंगा,
अरे चल न कितनी देर से कहे जा रहूँ, तू जितने पैसे चाहेगी, उतने दे दूंगा।
लड़की ने पीछे मुड़कर नहीं देखा, सुनती रही वे कहते रहे। बोल कितने रुपये लेगी?? सुनते ही लड़की पलटी, चलिए मामाजी कहाँ ले जाना है, मैं तैयार हूँ!!
सामने भांजी को देखकर मामाजी के हाथ-पांव फूल गए क्योंकि भांजी को पीछे से वे पहचान नहीं पाए।
भांजी को देखते ही उनसे कुछ कहते न बना, वे बोले, "मैंने तुझे पहचान लिया था, मैं तो तुझसे मजाक कर रहा था।"
लड़की: हाँ मामाजी मैं आपके मजाक को बहुत अच्छी तरह समझती हूँ। मैंने आपकी हरकत के बारे में सुन रखा था लेकिन मैंने भरोसा नहीं किया। पर आज नमूना देख लिया। मुझे बहुत बुरा लग रहा है, "आप मेरे मामा हैं। थू है तुम जैसे घटिया आदमी पर, जिसे अपनी उम्र का भी लिहाज नहीं। तुम जैसे लोगों की गंदगी का इल्ज़ाम युवा वर्ग पर लगता है किन्तु अश्लीलता तुम फैलाते हो!
अरे नहीं लाली तू ग़लत......
लड़की चली गई....
स्वरचित-सरिता श्रीवास्तव "श्री"
धौलपुर (राजस्थान)
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