मेरी चप्पल नहीं मिल रही बाहर बारिश हो रही है पैर गीले हो जाएंगे, बाहर कैसे जाऊ???
दादी ने आवाज लगाई, "बहू! बहू!"
बहू दौड़कर आई, "जी कहिए।"
छोरे की चप्पल नही मिल रही। ढूँढ कर देदे।।
बहू: "माँ जी चाय गैस पर रखी है। इससे कहिए अपनी चप्पल खुद ढूँढ़ कर लाएगा। हर बात के लिए रोकर आपकी गोद में बैठ जाता है।"
इतना कहकर बहू चली गई।
बच्चा जोर से रोने लगा!
दादी ने बच्चे को गोद में उठाया और चप्पल ढूँढ़ने चल दीं। बाहर कदम रखते ही गीली मिट्टी में फिसल गई। दादी-पोता दोनों गिर कर मिट्टी सें सन गए।
कच्चा होने की वजह से दोनों को चोट नहीं लगी।
अक्सर ये हमें घरों में देखने को मिल सकता है अगर दादी-दादा साथ में रहते हैं तो बच्चे अक्सर उनसे अपनी जिद पूरी कराते रहते हैं जो कि माता-पिता नहीं करते। इसमें बुराई नहीं है लेकिन एक दायरे की आवश्यकता है वर्ना अत्यधिक लाड-प्यार दुखदाई हो सकता है।
जैसे दादी 6 साल के बच्चे को गोद में उठाकर चल दी। अगर बच्चे से चप्पल ढूँढ़ने के लिए कहा गया होता तो दोनों नहीं गिरते!!
इसी प्रकार माता-पिता से छिपा कर दादा-दादी द्वारा पैसे देना, गलत हरकत पर पर्दा डालना, कि इसे कहीं डांट न पड़ जाए इत्यादि शामिल है। इसका परिणाम सामने आता है तो बहुत देर हो चुकी होती है।
कभी-कभी ये काम माता-पिता भी करते हैं। बच्चों की हर इच्छा पूरी करते हैं लेकिन वे क्या कर रहे हैं इस को नजरंदाज कर जाते हैं। जो कि दुखद परिणाम के रूप में सामने आ सकता है। हमें बच्चों को लेकर सजग रहना चाहिए।
अक्सर बच्चों पर नज़र रखनी चाहिए।
🙏🙏
स्वरचित-सरिता श्रीवास्तव "श्री"
धौलपुर (राजस्थान)
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